भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के पावर स्टार और भाजपा नेता पवन सिंह की निजी ज़िंदगी एक बार फिर सुर्खियों में है। अभिनेता और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच चल रहा तलाक विवाद अब लंबी कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। कुटुम्ब न्यायालय की पहल पर कराई गई काउंसिलिंग भी रिश्ते की दरार को भर नहीं सकी। अब रीकाउंसिलिंग की प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई है, लेकिन तय तारीख पर सुनवाई अधूरी रह जाने से मामला फिर टल गया। ऐसे में 24 फरवरी की अगली तारीख पर सबकी निगाहें टिक गई हैं।
Pawan Singh Divorce Case: सुनवाई के दिन क्या हुआ?
निर्धारित तारीख पर ज्योति सिंह अदालत पहुंचीं और न्यायालय के समक्ष उपस्थित भी हुईं। अदालत ने दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया था, ताकि रीकाउंसिलिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
लेकिन सुनवाई उस समय अधूरी रह गई जब पवन सिंह बीमारी का हवाला देते हुए अदालत में पेश नहीं हो सके। उनकी ओर से अस्पताल में भर्ती होने की सूचना न्यायालय को दी गई। इस कारण रीकाउंसिलिंग की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी और अदालत को सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।
ज्योति सिंह के अधिवक्ता आदित्य नारायण सिंह ने बताया कि 11 फरवरी को रीकाउंसिलिंग की तारीख तय थी। अदालत की स्पष्ट मंशा थी कि दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर सुलह की संभावनाएं तलाशें, लेकिन एक पक्ष की अनुपस्थिति के कारण प्रक्रिया अधूरी रह गई।
Pawan Singh Divorce Case: 2022 से लंबित है मामला
दोनों के बीच तलाक का विवाद नया नहीं है। जानकारी के अनुसार यह मामला वर्ष 2022 से अदालत में लंबित चल रहा है। इससे पहले भी काउंसिलिंग कराई जा चुकी है, लेकिन रिश्ते में आई खटास कम नहीं हो सकी।
बताया जाता है कि पवन सिंह ने 9 अक्टूबर 2021 को आरा फैमिली कोर्ट में अपनी दूसरी पत्नी ज्योति सिंह से तलाक की अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद 28 अप्रैल 2022 को ज्योति सिंह अदालत पहुंचीं और अंतरिम भरण-पोषण की मांग की। तभी से यह मामला कानूनी प्रक्रिया के दायरे में है और समय-समय पर सुनवाई होती रही है।
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Pawan Singh Divorce Case: सुलह की कोशिशें क्यों नाकाम रहीं?

कुटुम्ब न्यायालय का प्राथमिक उद्देश्य वैवाहिक विवादों को बातचीत और समझौते से सुलझाना होता है। इसी क्रम में दोनों पक्षों की काउंसिलिंग कराई गई थी।
सूत्रों के अनुसार, कई दौर की बातचीत के बावजूद रिश्ते में आई दूरी कम नहीं हो सकी। मतभेद इतने गहरे बताए जाते हैं कि आपसी सहमति की जमीन तैयार नहीं हो पाई। यही वजह है कि अदालत को रीकाउंसिलिंग का रास्ता अपनाना पड़ा।
Pawan Singh Divorce Case: लोकसभा चुनाव से पहले बढ़ी थीं सुलह की चर्चाएं
राजनीतिक सरगर्मियों के बीच एक समय ऐसा भी आया जब दोनों के बीच सुलह की चर्चाएं तेज हो गई थीं। लोकसभा चुनाव से पहले सार्वजनिक मंचों पर दोनों को साथ देखा गया था। उस दौर में यह कयास लगाए जा रहे थे कि शायद निजी विवाद खत्म हो जाए।
लेकिन चुनावी हलचल के बाद हालात फिर बदल गए और विवाद और गहरा गया। इसके बाद मामला फिर अदालत की चौखट पर लौट आया।
Pawan Singh Divorce Case: हाई-प्रोफाइल होने से बढ़ी चर्चा
यह मामला सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई बन चुका है। एक तरफ भोजपुरी सिनेमा के बड़े स्टार और सक्रिय राजनेता, तो दूसरी तरफ उनकी पत्नी — ऐसे में अदालत की हर तारीख चर्चा का विषय बन जाती है।
फिल्म इंडस्ट्री से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मामले की गूंज सुनाई देती है। फैंस भी लगातार इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि क्या दोनों के बीच समझौता होगा या तलाक की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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Pawan Singh Divorce Case: अब 24 फरवरी पर टिकी उम्मीदें
अदालत ने अब अगली सुनवाई के लिए 24 फरवरी की तारीख तय की है। इसी दिन रीकाउंसिलिंग की प्रक्रिया दोबारा कराए जाने की संभावना है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि रीकाउंसिलिंग वैवाहिक मामलों में अंतिम सुलह प्रयासों में से एक होती है। यदि इस बार भी सहमति नहीं बनती, तो अदालत आगे की कानूनी कार्यवाही तेज कर सकती है।
क्या निकलेगा समझौते का रास्ता या बढ़ेगी कानूनी जंग?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार दोनों पक्ष समझौते की दिशा में कोई कदम बढ़ाएंगे?
फिलहाल दोनों की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है। खामोशी जरूर है, लेकिन अदालत के गलियारों में इस मामले की चर्चा लगातार जारी है। आने वाली तारीख इस हाई-प्रोफाइल विवाद की दिशा तय कर सकती है।
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