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पटनाः बिहार विधानसभा में महज चार विधायकों के दम पर बिहार की सत्ता में भागीदार बने जीतन राम मांझी आए दिन तरह-तरह के बयान देकर सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं। चाहे शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला हो या फिर एनडीए की सरकार में एक और मंत्री पद का डिमांड करना। लेकिन अब जो पटना की सड़कों पर जो पोस्टर लगा है, उसमें मांझी की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है।

दरअसल, जीतन राम मांझी चाहे जिस भी सरकार में रहे अपनी महत्वकांझा को पूरा करने के लिए सहयोगी दलों के खिलाफ कुछ न कुछ कहते रहते हैं। बिहार में सरकार चाहे महागठबंधन की हो या फिर एनडीए की मांझी राजनीति के बड़े खिलाड़ी की तरह समय से पहले पाला बदलते रहते हैं और अपनी मंशा को पूरा करने के लिए जिस पाले में रहते हैं उसी के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं।

एनडीए के साथ जाने से पहले जब जीतन राम मांझी की पार्टी महागठबंधन की हिस्सा थी। तब उन्होंने शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ क्या कुछ नहीं कहा। एनडीए के साथ जाने के बाद से ही मांझी नीतीश कुमार के पाला बदलने का दावा कर रहे थे और उनका दावा सही भी साबित हो गया। बिहार में एनडीए की सरकार में वे सहयोगी बने और दो मंत्री पद की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाने लगे।

कैबिनेट का विस्तार हुआ तो उनके बेटे संतोष सुमन को दो विभागों का मंत्री बनया गया, जिसके बाद मांझी नरम पड़ गए। महज चार विधायकों के बल पर बिहार में सत्ता की चाबी हाथ में लेकर घूम रहे मांझी की नजर अब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा ने पटना की सड़कों पर बड़े बड़े पोस्टर लगाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा ठोक दिया है।

पोस्टर में लिखा गया कि, “कर दो हर पंचायत में एलान.. बिहार का मुख्यमंत्री होगा मांझी का संतान”। हम के राष्ट्रीय सचिव रंजीत कुमार की तरफ से पटना के पॉश इलाके बेली रोड ये पोस्टर लगाए गए हैं। इस पोस्टर को लेकर सियासत शुरू हो गई है और कहा जा रहा है कि जीतन राम मांझी का पेट एक, दो या तीन रोटी से नहीं भरने वाला है।

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